‘महाप्रभु जगन्नाथ’ रिव्यू: भक्ति और एनीमेशन का खूबसूरत संगम

Friday, Sep 04, 2026-03:19 PM (IST)

फिल्म- महाप्रभु जगन्नाथ 
भाषा- हिंदी, उड़िया और तेलुगु
निर्देशक- श्रीपाद वारखेडकर
रेटिंग- 2.5/5

Mahaprabhu Jagannath Review: इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर धार्मिक और पौराणिक फिल्मों का बोलबाला देखने को मिल रहा है। खास बात यह है कि कम बजट में बनी ऐसी फिल्मों को भी दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। इसी कड़ी में इस हफ्ते रिलीज हुई एनिमेटेड फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ भी अपनी सरल कहानी, भक्तिमय भावनाओं और शानदार विजुअल्स के साथ दर्शकों को आकर्षित करती है।

फिल्म का बजट भले ही सीमित हो, लेकिन इसका एनीमेशन कई जगह प्रभावित करता है। विजुअल ट्रीटमेंट फिल्म को एक बड़े कैनवास का एहसास देता है। खासकर बच्चों को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए रंगीन और रोमांचक दृश्य कहानी को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं। फिल्म शुरुआत से लेकर अंत तक दर्शकों को अपने साथ जोड़े रखने की कोशिश करती है।

रिलीज से पहले विवादों में आई फिल्म

‘महाप्रभु जगन्नाथ’ रिलीज से पहले कानूनी विवादों को लेकर भी चर्चा में रही। पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने फिल्म में भगवान जगन्नाथ के एनिमेटेड चित्रण पर आपत्ति जताई थी और फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की थी।

मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, लेकिन अदालत ने रचनात्मक अभिव्यक्ति के आधार पर फिल्म पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इस पूरे विवाद के कारण फिल्म की रिलीज करीब दो महीने तक अटकी रही। हालांकि, अब फिल्म सिनेमाघरों में दर्शकों के बीच पहुंच चुकी है।

क्या है ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ की कहानी

फिल्म की कहानी कलयुग की पृष्ठभूमि पर आधारित है। कहानी में ‘अहम’ नाम का एक शक्तिशाली असुर ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या करता है और उनसे एक अलग लोक बनाने का वरदान प्राप्त कर लेता है, जहां देवताओं का हस्तक्षेप न हो।

शक्ति हासिल करने के बाद अहम भक्तों और दिव्य शक्तियों को एक रहस्यमयी पारे की दुनिया में कैद कर लेता है। अब इस संकट से मुक्ति दिलाने की जिम्मेदारी महाप्रभु जगन्नाथ, बालक बलराम और गरुड़ पर आती है।

इसके बाद शुरू होती है अच्छाई और बुराई के बीच एक रोमांचक लड़ाई। महाप्रभु जगन्नाथ और उनके साथी मिलकर अहम की शक्ति का सामना करते हैं। कहानी में भक्ति, साहस और दिव्य शक्तियों के साथ कई ऐसे दृश्य आते हैं जो बच्चों को खास तौर पर पसंद आ सकते हैं।

एनीमेशन है फिल्म की बड़ी ताकत

फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसका एनीमेशन और विजुअल प्रेजेंटेशन है। सीमित बजट के बावजूद निर्माताओं ने फिल्म को भव्य दिखाने की पूरी कोशिश की है। रंगों, किरदारों और एक्शन सीक्वेंस पर किया गया काम कई जगह प्रभावशाली नजर आता है। लेकिन कई जगह लंबे डॉयलॉग होने की वजह से बच्चे डिसटे्क्ट भी हो सकते हैं।

निर्देशक श्रीपाद वारखेडकर ने कहानी को बहुत ज्यादा जटिल बनाने के बजाय इसे सरल और पारिवारिक अंदाज में रखा है। यही वजह है कि बच्चे आसानी से कहानी से जुड़ सकते हैं। फिल्म में धार्मिक आस्था के साथ मनोरंजन और रोमांच का संतुलन बनाने की कोशिश भी दिखाई देती है।

बच्चों और परिवार के लिए मनोरंजन

‘महाप्रभु जगन्नाथ’ की कहानी मुख्य रूप से बच्चों और परिवारों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। फिल्म में डर या जटिलता के बजाय भक्ति और अच्छाई की जीत को प्रमुखता दी गई है।

फिल्म का संदेश भी साफ है कि सिर्फ शक्ति और अहंकार के दम पर हर लड़ाई नहीं जीती जा सकती। सच्ची भक्ति, ज्ञान और सही उद्देश्य बड़ी से बड़ी मुश्किल का सामना करने की ताकत देते हैं।

हिंदी के साथ उड़िया और तेलुगु में रिलीज होने से फिल्म का दर्शक वर्ग भी बढ़ गया है।


Content Editor

Jyotsna Rawat

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