Review: सिनेमा जगत की सच्चाई और अनछुए पहलू उजागर करती है सलीम- जावेद की Angry Young Men

Tuesday, Aug 20, 2024-02:15 PM (IST)

एंग्री यंग मैन (Angry Young Men)
निर्देशक : नम्रता राव (Namrata Rao)

स्टारकास्ट : सलीम खान (Saleem Khan) , जावेद अख्तर (Jawed Akhtar) , सलमान खान (Salman Khan) , अरबाज खान (Arbaaz Khan) , हेलेन (Helen) , हनी ईरानी (Honey Irani) , फरहान अख्तर (Farhan Akhtar) जोया अख्तर (Zoya Akhtar), ऋतिक रोशन (Hrithik Roshan), अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan), अर्जुन पंचाल (Arjun Panchal), धर्मेन्द्र (Dharmendra), महेश भट्ट (Mahesh Bhatt) कोमल नाहटा (Komal Nahta), भावना सोमाया (Bhawana Somaaya),  शत्रुघ्न सिन्हा (Shatrughan Sinha), आमिर खान (Aamir Khan), राजकुमार हिरानी (Rajkumar Hirani), श्याम बेनेगल (Shyam Benegal), अनुपमा चोपड़ा (Anupama Chopra), यश (Yash), रणवीर सिंह (Ranveer Singh), ए. आर. रहमान (A. R. Rahman), जया बच्चन (Jaya Bachchan), रमेश तलवार (Ramesh Talwar), राहुल रवैल (Rahul Rawail), प्रेम चोपड़ा (Prem Chopra), करण जोहर (Karan Johar), नईम खान (Naeem Khan), फराह खान (Farah Khan), शबाना आजमी (Shabana Azmi), हेमा मालिनी (Hema Malini), रीमा कागटी (Reema Kagti), वरुण ग्रोवर (Varun Grover), सचिन पिलगांवकर (Sachin Pilgaonkar) 
ओटीटी : अमेजन प्राइम वीडियो (Amazon Prime Video)
रेटिंग: 4*

Angry Young Men Review : जब  तक बैठने को न कहा जाये शराफत से खड़े रहो, यह पुलिस स्टेशन है तुम्हारे बाप का घर नहीं -यह डायलाग है फिल्म 'जंजीर' का जिसने अमिताभ  बच्चन को एंग्री मैन के रूप में स्थापित कर दिया। लेकिन इस फिल्म की सशक्त कथा और पटकथा लिखने वाली मशहूर लेखक जोड़ी -सलीम-जावेद थी।  हममें से कई लोग सिर्फ नायक नायिकाओं और फिल्म के विलेन आदि को ही याद रखते हैं लेकिन फिल्म के कथा -पटकथा और संवाद लिखने वालों का नाम भी नहीं जानते होंगे। ऐमज़ॉन प्राइम  ऐसी ही एक मशहूर लेखक जोड़ी सलीम-जावेद की जीवनी, उनके काम करने  के स्टाइल और उनके साथ काम करने वालों की उनके प्रति राय से जुड़ी डॉक्यूमेंट्री सीरीज ' एंग्री यंग मेन' लेकर आई है जो 20 अगस्त से अमेज़न प्राइम पर रिलीज हो रही है l ये सीरीज तीन एपिसोड की है जिसमें सबसे ज्यादा फोकस साल 1975 में रिलीज हुई ‘शोले’ और ‘दीवार’ फिल्म पर है।

प्राइम वीडियो की नई तीन-भाग वाली डॉक्यूसीरीज़ एंग्री यंग मेन की शुरुआत बहुत ही शानदार तरीके से होती है। जिसमें आमिर खान से लेकर रणवीर सिंह, ऋतिक रोशन से लेकर करण जौहर तक कई बॉलीवुड स्टार्स ने सलीम जावेद के काम पर पूरी एक्साइटमेंट के साथ बातचीत की। ये बातचीत का दौर किस तरह उस मोड़ मुड़ता है जब दोनों इंडस्ट्री में नए नए आए थे। उन्हें इंडस्ट्री में काम के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा था इसके अलावा कैसे इन सभी वजहों से एंग्री यंग मैन वाली घटना ने जन्म लिया।

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लेखकों की इस सुपरहिट जोड़ी ने ऐसी अनेकों फिल्मों की कहानियां लिखी जो फिल्मों के इतिहास में  मील का पत्थर साबित हुईं । इस महान लेखक जोड़ी ने एक ऐसी ऐतिहासिक कल्ट फिल्म 'शोले' की भी कथा, पटकथा और संवाद लिखे जिसने बॉक्स ऑफिस पर ऐताहिसक रिकॉर्ड बनाया।  'कितने आदमी थे, वो दो और तुम तीन फिर भी खली हाथ लौट आये क्या सोच कर आये थे, सरदार खुश होगा , शाबाशी देगा ' -यह ऐसा सरल किन्तु प्रभावी डायलाग है जो बच्चे-बच्चे की जुबान पर है । अमेज़न की यह डोक्युमेंट्री सीरीज  इन महान लेखकों की जीवनी और उनके करियर पर रौशनी डालती  है ।  इस डॉक्यूमेंट्री सीरीज के पहले सीजन में तीन एपिसोड्स हैं , जिसमें सलीम-जावेद के काम,  उनके जीवन और उनके साथ काम करने वालों की उनके बारे में क्या राय आदि के बारे में  बताया गया है  ।  इन दिग्गज लेखकों  की जोड़ी ने करीब 24 फिल्मों की कथा-पटकथा और संवाद लिखे  और इनमें से  20 फिल्में सुपरहिट रहीं जिनमें  शोले, ज़ंज़ीर, दीवार, दोस्ताना, शान, डॉन   आदि शामिल हैं ।

इस डॉक्यूमेंट्री सीरीज में यह भी बताया गया है कि कैसे बाहर से होते हुए भी इस जोड़ी ने अपनी मेहनत, लगन और जूनून से फिल्म इंडस्ट्री में अपना सिक्का जमाया, और फिर कैसे यह जोड़ी कुछ मतभेदों के चलते अलग अलग हो गई।        

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खुश तो बहुत होंगे तुम ......। आज मेरे पास बांग्ला है, गाडी है बैंक बैलेंस है तुम्हारे पास क्या है - मेरे पास मां है । अमिताभ बच्चन और शशि कपूर के बीच बोले गए यह संवाद भी इस लेखक जोड़ी की कलम से ही लिखे गए हैं । मां का दर्जा कैसे सब सम्पतियों से ऊपर है यह केवल मेरे पास मां है -एक छोटे से संवाद में बहुत कुछ कह दिया। लेखन का ऐसा कमाल की हर कोई वाह कह उठें। दर्शकों की नब्ज तक पहंचते हुए इन्होंने फिल्मों की जो भी कहानियां लिखी वो एक साधारण को अपनी ही कहानी जैसे लगती थी । 

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सलीम-जावेद  की लेखनी का असर सिर्फ कहानी तक ही नहीं किरदारों में साफ़ देखा जा सकता है । जितनी मेहनत  से यह नायकों के किरदार और डायलाग  लिखते थे उतनी ही मेहनत से ये विलेन के भी किरदार लिखते थे  है  और ये  किरदार भी ऐसे होते थे जो कहानी की तरह सशक्त होते थे। उदाहरण के लिए  शोले में गब्बर का किरदार ,  ज़ंज़ीर में  लायन का किरदार और  शान में शकाल का किरदार  और उनके द्वारा बोले गए डायलाग लोगों को आज तक याद हैं। कहने का तातपर्य है कि चरित्र चित्रण और संवाद के भाषा जो इन लेखक जोड़ी ने पेश की वो अब तक एक मिसाल है।  

अब इन दिग्गज लेखकों पर बनी सीरीज दर्शकों को खूब पसंद आने वाली है जहां ये जोड़ी न केवल अपनी लेखन स्टाइल के बारे में बात करें बल्कि कलकारों के साथ अपने तुजुर्बे भी संजह करते दिखेंगे।

Saurce: Navodaya Times


Content Editor

Jyotsna Rawat

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