Exclusive Interview: चमक'' चमक के पीछे के अंधेरे को दिखाती है - रोहित जुगराज
Wednesday, Mar 26, 2025-01:57 PM (IST)

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री की चमक-धमक, ग्लैमर और उसके पीछे छुपे संघर्षों को बखूबी दिखाने वाली सीरीज़ 'चमक' को दर्शकों द्वारा काफी पसंद किया गया था और तब ही से इसके दूसरे पार्ट का भी इंतज़ार चल रहा था और अब ये इंतज़ार भी खत्म होने वाला है क्यूंकि सोनीलिव पर इसका पार्ट 2 और भी ज्यादा रोमांच और नए ट्विस्ट के साथ वापस आ रहा है।
'चमक' सीजन 1 का दूसरा पार्ट 4 अप्रैल को सोनीलिव पर रिलीज़ किया जाएगा जिसमें एक बार फिर परमवीर चीमा , मनोज पाहवा , ईशा तलवार , मुकेश छाबड़ा और मोहित मालिक लीड रोल में नज़र आएंगे। सीरीज़ को डायरेक्ट किया है रोहित जुगराज ने।
इसी के चलते सीरीज़ के डायरेक्टर रोहित जुगराज और लीड एक्टर्स परमवीर चीमा ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी, और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश:
रोहित जुगराज
1 - क्या ये पहले से ही प्लैन्ड था कि सीरीज़ को 2 पार्ट्स में रिलीज़ करना है ?
ये सोनिलिव की स्ट्रेटजी है और मुझे उन पर विश्वास है और उम्मीद भी है कि ये काम करेगी। क्यूंकि ये इतना इंटेंस वर्ल्ड है ,और रियलिटी के इतना करीब है , पूरी दुनिया को पता है जो होता है पंजाबी सिंगर्स के साथ , हमारा वर्ल्ड उस चीज़ पर बेस्ड है। और इसके साथ तो एंटरटेनमेंट भी है। तो लोगों को वो फील करवाना बहुत जरूरी था। इसमें 28 गाने है 14 अलग-अलग सिंगर हैं , पंजाबी मुसिक का हर जॉनर है। तो लोगों में एक्ससिटेमेंट लानी जरूरी थी और मुझे लगता है कि ये स्ट्रेटेजी काम करेगी।
2 - जब भी पंजाबी मुसिक की बात करते हैं तो मन में सिर्फ ख़ुशी आती है लेकिन पंजाबी इंडस्ट्री की जो डार्क रियलिटी इसमें दिखाई गई है उसका आईडिया कैसे आया ?
जो पंजाब से बाहर एक्सपोर्ट होता है वो है जश्न , लेकिन पंजाब में सूफी भी है , भक्ति संगीत भी है , सैड सांग्स तो मेन पार्ट हैं पंजाब का , क्यूंकि पंजाब ने बहुत सारा दर्द देखा है। और वैसे भी जब ट्रेजेडी ज़्यादा हो जाती है तो वहां से हंसी शुरू होती है। आदमी हंसना शुरू करता है। और चमक भी इसी चीज़ को दिखाती है चमक सिर्फ सेलेब्रेशन्स को नहीं दिखाती , 'चमक' चमक के पीछे के अंधेरे को दिखाती है। चमक का यूएसबी ही यही है कि इसमें आप पंजाबी इंडस्ट्री का हर रंग देखेंगे।
3 - तो अब दूसरा पार्ट कहां से स्टार्ट होता है ?
वहीँ से जहां से ऑडियंस को छोड़ा है। हम कुछ भी ऐसा धोखा नहीं देंगे ऑडियंस को कि 6 महीने आगे हैं। वहीँ से शुरू होगा जहाँ काला को पुलिस ने उठाया था। तो अब ये जर्नी है एक लड़के की कि क्या ये सिंगर भी बन पाएगा , क्या ये सुपरस्टार भी बन पाएगा , और क्या ये साथ में अपने पेरेंट्स का मर्डर मिस्ट्री भी सॉल्व कर पाएगा। क्या उनसे बदला ले पाएगा , और इसी के साथ में अंडर बेल्ली एक्स्प्लोर करी है पंजाबी मुसिक माफिया की।
4 - ये सीरीज़ बनाना डेरिंग भी है और स्कारिंग भी , क्या इस सीरीज़ को बनाते वक्त कोई डर लगा था ?
हां दोनों ही है और उसी से मज़ा भी आता है , क्यूंकि अगर आप एक आर्टिस्ट के तौर पर खुद को स्ट्रैच नहीं करेंगे तो ना खुद बेटर हो पाएंगे ना सोसाइटी तक वो बातें पहुंचा पाएंगे जो कहना चाहते हैं। एंटरटेनमेंट तो इसमें है ही लेकिन साथ में थोड़े से सवाल तो उठाने ही पड़ेंगे ना। इसमें मेरे पास इतना मटेरियल है कि इस्पे अभी और बहुत कुछ बनेगा। ये पंजाब के मुसिक का एक वर्ल्ड है। जितनी यहां प्यूरिटी है उतनी और इंडस्ट्री में नहीं है। चमक में हम पंजाब के इलावा भी दूसरी इंडस्ट्री और आर्टिस्ट की बात करेंगे , उनकी कहानी दिखाएंगे।
5 - इस कहानी को दिखाने की वजह क्या है ?
यही कि ये सच है ,अंडर बेल्ली सचाई है। साथ ही उस सचाई में इतना एंटरटेनमेंट है न कि ऑडियंस को वर्ल्ड सक कर लेगा। ऑडियंस को ग्रिप कर लेगा।
6 - क्या अब इस पार्ट में सारे किरदारों का चेंज होगा ?
सबके आर्क्स कंप्लीट होंगे। स्पेशली गुरु , जो मोहित मालिक ने बखूबी प्ले किया है , बहुत अच्छे से एलजीबीटी कम्युनिटी को दिखाया है। जिसका ब्रेकअप पेन दिखाया गया है अब उसके बाद क्या होगा गुरु का क्या वो अपने फॅमिली बिज़नेस में आएगा या कुछ और करेगा। ये सब दिखेगा। सब कुछ ही इसमें बहुत अच्छे से दिखाया गया है आप लोग जरूर एन्जॉय करोगे।
7 - इसमें कई सारे और सिंगर और एक्टर्स की भी गेस्ट अपीरन्स है जो कहानी का हिस्सा नहीं है , तो कैसे किया सब कुछ मैनेज ?
जैसे ही सबने सुना कि ये इस दुनिया की कहानी है तो हर कोई चाहता था कि ये कहानी बाहर आणि चाहिए। तो जब उन्हें पता चला कि ये उस दुनिया की कहानी है जो दुनिया उन्होंने जी है , वो धमकियां भी उन्होंने जी हैं देखी भी हैं। मैंने मीका भाजी को यही बोला था कि आप अपना ही किरदार निभाए मीका सिंह वाला क्यूंकि ये दुनिया मेरी दिखानी बहुत जरूरी है। मान लीजिये कि मैं किसी और किरदार को लेकर आ जाता और नाम कोई और देता तो लोग उतना नहीं अपनाते।
परमवीर चीमा
चमकीला का वो एंड है जहां से 'चमक' शुरू होती है - परमवीर चीमा
1 - चमक पार्ट 2 मैं काला की ज़िंदगी में क्या बदलाव आने वाले हैं ?
जैसे आपने पहले पार्ट में देखा काला कनाडा से पंजाब आया , यहां आकर स्ट्रगल किया , पैसे भी नहीं हैं , लेकिन फिर भी कुछ ना कुछ जुगाड़ वो कर ही रहा है। पहले में आपने देखा कि एक बहुत बड़े स्टेज पर पहुँच कर काला ने ये ऐलान कर दिया कि तारा का बेटा मैं ही हूँ , अब डिम्पी काले को सपोर्ट करता है , उसकी सपोर्ट और काला की फैन बेस से अब जो ये काला उठेगा दूसरे सीजन में , अब रोकने के लिए कुछ नहीं है। अब पैसा भी आ गया , गाड़ी भी आ गई , मशहूर भी हो गया , यानी सब कुछ हो गया है। इसमें बहुत स्टाइल है , आप बहुत कॉन्फिडेंट काला को देखोगे। क्यूंकि उसके पास पैसा है लेकिन मेन जिससे उसे शांति मिलनी है वो है बदला। जब पैसा और पावर आती है तो कुछ चीज़ें पता करनी आसान भी हो जाती हैं। कुल मिलकर कहें तो सेकंड सीजन में काला का स्टाइल और बदले की भूख धीरे-धीरे बढ़ती ही जाएगी। वैसे भी कहते हैं ना कि जब पैसा और फेम मिलता है तो इंसान पिछली चीज़ें भूल जाता है मगर काला भूलता है या पकड़ कर रखता है पुराणी चीज़ें ये देखने को मिलेगा आपको सेकंड सीजन में।
2 - 'चमक' को लोग चमकीला के साथ जोड़ कर देख रहे हैं , क्या कहना है इसपर आपका ?
पंजाब में ऐसी घटनाएं काफी हुई हैं। कुछ टाइम पहले सिद्धू के साथ भी हुई , धमकियाँ भी मिलती रहती हैं , गोलियां चलने की खबरें भी मिलती ही रहती हैं। तो 'चमक' बस इंस्पायर्ड है रियल इवेंट्स से। गिप्पी ग्रेवाल वाला सीन बस वैसा है इंस्पायर वहां से है लेकिन रिलेशन कुछ नहीं है। आगे कहानी एकदम अलग है कोई भी आर्टिस्ट मरे तो मुझे लगता है कि यही प्रोसेस रहेगा ढूंढ़ने का। चमकीला का वो एंड है जहां से 'चमक' शुरू होती है। ये स्टोरी हमने बनाई है कि उसके बाद क्या होता है हर किसी के साथ।
3 - सीरीज में पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री के ग्लैमर और संघर्ष को दिखाया गया है तो इसे पर्दे पर लाने का एक्सपीरियंस कैसा रहा ?
रोहित सर ने पंजाब में काफी फ़िल्में की हैं , उनका अच्छा ख़ासा फैन बेस है पंजाब में और पंजाबी इंडस्ट्री के काफी सिंगर और एक्टर हैं। वो पहले से इस चीज़ को देख चुके थे जी चुके थे और उन्होंने अपनी रिसर्च पूरी की थी। चमक आई तो उन्होंने इसपर और काम करना शुरू किया। तो मुझे लगता है कि उनकी क्रिएटिवली रिसर्च बहुत स्ट्रांग थी। मुझे इतना आईडिया नहीं था कि क्या हुआ होगा मुझे इतना पता था कि ये हुआ पर कैसे हुआ ये मुझे पता नहीं था। क्यूंकि जब से मैंने एक्टिंग शुरू की मैं मुंबई आ गया था पंजाब में मैंने काम किया नहीं था। लेकिन मेरे दोस्त मुझे कुछ चीज़ों के बारे में बताते रहते थे फिर मैंने भी उनसे और सवाल जवाब करने शुरू किये। मैंने रोहित सर से डिस्कस किया तो उन्होंने कहा कि तू आइडियाज देता रह क्या पता मुझे भी कुछ नया मिल जाए। तो फिर हमने मेरे और उनके आइडियाज के साथ एक कहानी डिज़ाइन की। फिर हम ये एक करैक्टर तैयार किया।
4 - काला के पास टैलेंट भी था लेकिन साथ में लक भी , आप लक को मानते हो ?
मैं तो बहुत मानता हूँ लक को। मैं तो हमेशा कहता हूँ कि बॉम्बे में मुझसे भी टैलेंटेड एक्टर्स बहुत हैं जो अभी तक काम नहीं कर रहे , जो अभी तक लाइमलाइट में नहीं आए। हमने मेहनत की है लेकिन लक बहुत बढ़ा फैक्टर है। मैं आज भी कई बार यही सोचता हूँ कि ये मेरे साथ कैसे हो गया , समझ में नहीं आता कुछ भी। लेकिन भगवान् का हाथ और आपके कर्म बहुत मायने रखते हैं। अगर आप अच्छे काम करोगे तो भगवान खुद आपको जाएंगे।
5 - पीछे मुड़कर देखते हो तो कैसा लगता है ?
बहुत अच्छा लगता है , पहले जैसे कुछ चीज़ें थी जिसके कारण मुझे लगता था कि मेरे पापा मुझे डांट रहे हैं मार रहे हैं , क्यों मुझे पहले काम नहीं मिला। लेकिन अब जब पीछे देखता हूँ तो उस जर्नी का मतलब समझ आता है। सोचता हूँ कि जिन चीज़ों को कोसता था अगर वो नहीं हुई होती तो आज ये नहीं होता। समझ आता है कि जो किया सही किया था तभी मैं यहां पहुंचा हूँ। और वो जर्नी भी मुझे बहुत खूबसूरत लगती है क्यूंकि अगर वो जर्नी नहीं होती तो ये फैन फेम कुछ भी नहीं होना था। मुझे लगता है कि हर किसी की जर्नी ही उसे बनाती है।
6 - 'चमक' से आपने पर्सनली और प्रोफेशनली क्या सीखा ?
परसनली यही सीखा कि फेम को दिमाग पर नहीं चढ़ने देना क्यूंकि ऐसा हुआ तो दिमाग खराब हो जाता है जैसे आप देखोगे कि काला के साथ भी वो सीन होगा। इमोशंस की ज़्यादा समझ आने लगी कि लोग है या नहीं है वो मैटर नहीं करता अगर आप उनसे खासतौर अपने माँ- कनेक्टेड हो तो वो हमेशा आपके साथ रहेंगे। अगर आपका कोई है ज़िंदगी में जो चला गया आप उसको हमेशा दुखी होकर नहीं याद कर सकते। अभी सेकंड सीजन में आप देखेंगे कि काला बहुत खुश होता है अपने माँ-बाप को याद करके। और प्रोफेशनली तो यही सीखा कि लोगों से कैसे डील करना है। क्यूंकि काला बहुत स्मार्ट है मैं उतना स्मार्ट हूँ नहीं लेकिन मुझे भी धीरे धीरे चीज़ें समझ आने लग गई हैं कि कई बार गेम खेलनी पड़ती है हर चीज़ें ब्लैक और वाइट नहीं होती कुछ चीज़ें ग्रे भी होती हैं और ग्रे जोन में कैसे प्ले करना है।
7 - ओटीटी पर सेंसर की बात बार-बार उठती है , क्या कहना है इसपर आपका ?
सेंसर एक लिमिट तक हर जगह होना चाहिए। लिमिट क्रॉस नहीं होनी चाहिए लेकिन आजकल जब सेंसर को थोड़ा सा भी राइट मिलता है तो लोग सबकुछ थोपने लगते हैं। मैं मानता हूँ कि ओटीटी पर ज़्यादा रुकावट नहीं होनी चाहिए क्यूंकि ओटीटी बहुत रियलिस्टिक सिनेमा है वो बहुत रियल है और सबकुछ बहुत रियल दिखाया जाता है। सच में हम गालियां वालियां देते हैं। सिनेमा और ओटीटी बहुत अलग है। सिनेमा बड़ी स्क्रीन है हम फॅमिली के साथ जा सकते हैं अब अगर ओटीटी और सिनेमा एक जैसा हो जाए सेंसर वाला तो मज़ा कहा है। आपको रियलिटी के साथ जोड़ने के लिए कुछ चीज़ें दिखानी पड़ती हैं पर लिमिट्स के साथ।