प्रसिद्ध हिंदू गायक प्रलोय चाकी की बांग्लादेशी पुलिस कस्टडी में मौत, परिवार ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

Tuesday, Jan 13, 2026-11:42 AM (IST)

मुंबई. बांग्लादेश के फेमस हिंदू गायक और बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी, अवामी लीग के प्रोलॉय चाकी की रविवार रात मौत हो गई। बताया जा रहा है कि सिंगर की मौत पुलिस हिरासत में रहते हुए राजशाही मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हुई। प्रोलॉय के निधन के बाद उनके परिवार में भारी आक्रोश है और उनका इल्जाम है कि जेल में उन्हें अच्छी तरह से इलाज नहीं मिला, जिस वजह से उनकी मौत हो गई।हालांकि, जेल प्रशासन ने इन आरोपों से इनकार किया है। 

 

पबना जिला जेल के सुपरिटेंडेंट ओमर फारूक ने एएनआई से सिंगर प्रलोय चाकी के निधन की पुष्टि करते हुए बताया, 'प्रलोय चाकी को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल से जुड़ी समस्याएं थीं। इसी वजह से जेल के डॉक्टरों ने पहले उन्हें पबना सदर अस्पताल भेजा। वहां से शुक्रवार रात को उन्हें राजशाही मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया गया था, जहां रविवार रात 9 बजे के बाद इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।'
 

प्रलोय के बेटे का आरोप
प्रलोय चाकी के बेटे और संगीत निर्देशक सोनी चाकी के मुताबिक, उनके पिता को किसी भी मामले में नामजद न होने के बावजूद हिरासत में लिया गया। चाकी के निधन के बाद आवामी लीग में काफी नाराजगी है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि चाकी इलाके में काफी लोकप्रिय थे।
 


क्यों हुई थी चाकी की गिरफ्तारी?
पिछले साल दिसंबर में पुलिस ने प्रोलॉय चाकी को 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुए एक धमाके से जुड़े मामले में अरेस्ट किया था। इन्हीं विरोध प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। वहीं, उनके परिवार का दावा है कि गिरफ्तारी के वक्त केस में चाकी का नाम तक शामिल नहीं था, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में लिया गया। यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई, जब अंतरिम सरकार के दौरान अवामी लीग से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई की जा रही थी।
 
कौन थे प्रोलॉय चाकी?

प्रोलॉय चाकी सिर्फ एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि बांग्लादेश के एक चर्चित संगीतकार और सांस्कृतिक कार्यकर्ता भी थे। वे अवामी लीग की पबना जिला इकाई में सांस्कृतिक मामलों के सचिव थे और 1990 के दशक से सांस्कृतिक आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। उनके गाने और प्रस्तुतियां खासतौर पर अल्पसंख्यक और प्रगतिशील समुदायों के बीच काफी लोकप्रिय थीं।


Content Writer

suman prajapati

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